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Vipul Hadiya is an Indian expert Prestahop and Wordpress developer having 4+ years of experience of working with clients of almost 22 countries around the world.
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डिझिटल इण्डिया की मा की आँख

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“डिझिटल इन्डिया” अगर आपने ये शब्द सुना है तो मुबारक हो आपको भी बाकी सभी भरतीय नागरिको की तरह बेवकुफ बनाया गया है। और जिसे लगता है की भारत मे सचमुच अैसा कोेइ केम्पेइन चलता है उसे तो बेवकुफ के साथ गधा भी बनाया गया है।

शायद आपको डिझिटल इन्डिया केम्पेइन सफल लग रहा होगा पर हकिकत मे ऎसा है हि नहि, ऎ सिर्फ ऎक पब्लीसीटी स्टँट है जो हमारी सरकार को सुर्खियो मे रखता है। ऎ बात इसलिये नहि लिखि जा रहि है की मुझे वर्तमान सरकार से कोइ शिकायत है, और जब कोइ उम्मीद ही नहि थी तो शिकायत का सवाल हि नहि रहेता। पर गणताँत्रिक भारत के ऎक टेक्स पेयर की हेसियत से हम अपने देश मे कुछ निम्म सुविधाये मिले अैसा जरुर चाहते है।

चलिये बाकी सभी बातो को बाजु पर कर के बात करते है “डिझिटल इन्डिया” नाम के ऎक केम्पेइन किे जिसका सच मे कोइ वजुद है हि नहि।

हो सकता है की शायद आपकी हालत हमारी तरह ना हो और वहाँ पर किसी वजह से सरकार अच्छा काम कर रहि हो पर मैँ बात कर रहा हु हमारे देश के सबसे ज्यादा सुर्खियो मे रहे और देश के मोडेल स्टेट की तरह जनता को दिखाये गये राज्य गुजारत की। गुजरात के भावनगर डिस्ट्रीक्ट के महुवा तालुका की हालत आज भी वैसी ही है जैसी आझादि से पहेले थी।

हमारी सरकार वैसे तो डिझिटल इन्डिया की बाते कर रहि है ऒर हम चाहते भी है की इन्डिया डिझिटल हो पर उससे पहेले हम चाहेँगे कि इन्डिया पारदर्शक हो, अपने सरकारी कामकाज मे, जनता के तरफ अपनी जिम्मेदारी मे। हा तो हम बात कर रहै है महुवा की, अगर आप ये पढ रहे है तो आपको ये मालुम होना चाहिये की हम उस महुवा की बात कर रहै है जहाँ चालीस से भी ज्यादा होस्पिटल है और दस से भी ज्यादा बेन्क्स है। शायद तीस से ज्यादा स्कुल और दो कोलेज है। आपको लगेगा की तब तो ये ब हुत अच्छी बात है कि महुवा मे इतनी सारी सुविधायेँ है, लेकिन अब जरा सोचिये क्या होगा अगर बिजली ना हो तो? हा, होँगे जनरेटर्स होस्पिटल्स के पास पर क्या ये सरकार की जिम्मेदारी नहि है की अगर डोक्टर्स टेक्स भर रहे है तो सरकार उन्हे वक्त पर बीजली मुहैया करवाये? क्या ये सरकार की जिम्मेदारी नहि की अगर बेन्क देश की ईकोनोमी चला रहि है तो सरकार वहाँ बीजली का ध्यान रखे? अगर आप हिन्दी पढ सके उतने पढे-लिखे है तो आप मे इतनी समझ भी तो होगी की बेन्क मे पैसो से ज्यादा बीजली और इन्टरनेट की जरुरत होती है।

ये भी कोइ बडी समस्या नहि है, असल समस्या शरु होती है “महुवा तालुका सदन” से यानी की हमारी मामलतदार कचेरी से। हर शुक्रवार को हमारे यहाँ बीजली नहि होती, पुरे दिन। आपको पता है राशन कार्ड, जमीन के 7-12-8-अ फोर्म्स, मिल्कियत के दस्तावेज, ऎफिडेविट्स सब वहाँ पर हि होते है और शुक्रवार को कचेरी की हालत बिलकुल रविवार की तरह होती है। जि हाँ यहाँ के कर्मचारी को हप्ते मे दो दिन छूट्टि मिलती है, रविवार की औपचारिक छूट्टि और शुक्रवार को पावर कट के हिसाब से अनौपचारिक छूट्टि।

महुवा मे सो से ज्यादा गाँव है और सभी के लिये ये ऎक ही कचेरी है मतलब शुक्रवार को सौ से ज्यादा गाँव के जिक्र किये सभी काम बँध रहेते है। सो गाँव, इसको सो गाँव की तरह मत देखिये, ये देखिये की हर गाँव की ऎवरेज आबादी चार हजार से ज्यादा है। इतना सब पढने के बाद अगर आपका दिमाग चकराने नहि लगा तो सिर्फ दो बाते हो सकती है की या तो आपने ऎसी कचेरी मे कभी कोइ काम नहि करवाया या फिर आप कीसी वजह से सच का सामना नहि करना चाहते है।

हररोज मामलतदार की कचेरी मे, पक्का तो नहि पर, ऎक हजार से ज्यादा लोग कुछ ना कुछ काम से इन सो से अधिक गाँवो से आते है और शुक्रवार को उनका काम नहि होता। और मे अैसे पाँच सोे से ज्यादा लोगो के नाम दे सकता हुँ जो कहेँगे की “इन्टरनेट कनेक्टिवीटी नहि है।” या “सर्वर डाउन है, उपर से हि।” इस वजह से उनके काम वक्त पर नहि हो पाये है।

फाइनल शोट: जिस देश मे सिर्फ पावर कट रेग्युलर हो और हप्ते मे तीन दिन सर्वर डाउन रहेता हो उस देश के प्रधानमँत्री केशलेस इकोनोमी का सपना देख रहे है। हा भई, सपने देखने मे हर्ज ही क्या है। देखो देखो।

About Vipul Hadiya

Vipul Hadiya is full time Prestashop and Wordpress Developer. Active at both job and freelancing on Upwork.com (formerly oDesk). He has interest to share Prestahsop tutorials for beginners.

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